रूद्राक्ष महत्व – रुद्राक्ष की पहचान – हिन्दी भाषा

भगवान शिव रुद्राक्ष दाना महत्व और  नेपाल रुद्राक्ष माला विस्तार

“हिन्दि भाषा संस्करण ” अंकित दुलाल से - अंग्रेजी के लिए माउश से अंग्रेजी मे दाबिये !- “अंग्रेजी (English)” 

1 – रुद्राक्ष क्या है ?

- रुद्राक्ष (English name :- “Rudraksh // Rudraksha”) एक किसिम के दाना(फल) हे ! रुद्राक्ष के वृक्ष और पेड़ को ‘रुद्राक्ष के पेड़’ कहते है ! वही महत्वपूर्ण पेड़मे फल्ने वाला दाना(फल) को ही रुद्राक्ष कहते हे !हिन्दु धर्म मे रुद्राक्ष के पेड़ और रुद्राक्षदाना दोनो का बराबर महत्वपूर्ण हे ! आज भी हम विभिन्न घरवो मे रुद्राक्ष के पेड़ को पुजा कररहे और रुद्राक्ष समन्धी ज्ञात महापुरुष भक्तोने एक दाना रुद्राक्ष को लकेट बनाकर और १०८ रुद्राक्ष दाना से बनाहुवा रुद्राक्ष की माला गले मे धारण किया हुवा देख्ने मे मिलसकता है !हिन्दु धर्म मे रुद्राक्ष के बहुत उचाई हे ! ये भी कहाँगया हे की रुद्राक्ष स्वोयम भगवान शिव ही हे और रुद्राक्ष दाना भगवान महादेव(पशुपतिनाथ) जी के प्रिये आभूषण भी हे! रुद्राक्ष से समन्धीत  सम्पूर्ण जानकारी हमारे हिन्दु धर्म के विभिन्न ज्ञानबर्द्धक पुस्तको और बढे बढे पुस्तक जैसे शिव पुराण,देवी भागवत गीता मे सम्पूर्ण जानकारी सहित मिलता है और विस्तार किया गया हे !

रुद्राक्ष के वृक्ष खासगर नेपाल मे मिलता है!की सी भी अवस्था में यदि दुसरा जगा मिल जाएगी तो भक्तजनको नेपाल का ही रुद्राक्ष पुजा और धारण करने मे लाभदायिक होगा क्युकी नेपाल का रुद्राक्ष ही शक्तिशालि होता है ! इंडिया मे भी किसी किसी जगामे रुद्राक्ष मिलता है लेकिन नेपाल की तरह गुणवत्ता नही होती है !भारत मे खासकर रुद्राक्ष आसम और हरिद्वार मे मिलता है लेकिन रुद्राक्ष मे ज्यादा तर छेद नही होता है !  रुद्राक्ष आदिकाल से बढे बढे ऋषि,मुनि,साधु,सन्त,तपवस्यीने पसंद और रोजा हुवा है !भारत से विभिन्न श्रदालु भक्तजन नेपाल भ्रमण मे श्री पशुपतिनाथ मन्दिर दर्शन करके यहाँ से रुद्राक्ष खरिद कर लेजाते है !नेपाल मे रुद्राक्ष खासकर काठमाडौँ,झापा,सिन्धुपाल्चोव्क ,भोजपुर.बिराटनगर,काब्रे आदि विभिन्न जगामे उत्पादन होता है !

रुद्राक्ष की उत्पन्न समन्धी प्रसङ्ग मे पुराण के अनुसार ये कहाँ गई हे की “रुद्राक्ष भगवान शिवजी के आँखके आशु से उत्पन्न हुवागया है!एकबार शिवजी ने एक हजार बर्षो से ज्यादा ध्यान करके आँख खोल्ने के बाद कुछ बूँदें आशु आँखसे गिर्ने से, वोही भूमि से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुवा गया है !वोही शिव जी के रुद्राक्ष वृक्ष मे ही रुद्राक्ष उत्पादन होता है !भगवान शिव ने  अपने पुत्र कुमार से ए भी  कहाँ हे कि है “हे कुमार मे सम्पूर्ण देवी देवता के साथ रुद्राक्ष मे विराजमान हु और किसिभी मनुष्य,ऋषि ,साधु ,सन्त रुद्राक्ष को पुजन और धारण करता हे मे उसके कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहता हु !”.

१८ पुराण मे से  कुछ पुराण मे ये भी लिखा है कि रुद्राक्ष भगवान शिव शंकर भोले बाबा  के शरीर से  कुछ बुन्द पसीना गिरने से भी उत्पन हुवा है! ये लिखा है कि रुद्राक्ष के पेड भगवान शिव के पसिना से उत्पन हुवा है !भगवान शिव के रुद्राक्ष पेड मे हि विभिन्न प्रकार के रुद्राक्ष उत्पादित होता है ! विभिन्न प्रकार के रुद्राक्ष के जानकारी सभी पुराण मे बिस्तृत कियागया है !

रुद्राक्ष सब्द संस्कृत भाषा से आयाहुवा है !संस्कृत भाषामे रुद्राक्ष दो सब्द से बनाहुवा है ! दो सब्द के नाम रुद्र + आक्ष है जिसमे रुद्र भगवान शिव के अनेक  नामो मे से एक है और आक्ष का अर्थ
आँखके आशु होता है ! रुद्राक्ष भगवान शिव के आशु के बुन्द से उत्पन्न होने के कारण रुद्राक्ष नाम पडा हुवा है !

इकलौता रुद्राक्ष की  पेड़ मे विभिन्न प्रकार और भेद के रुद्राक्ष दाना(फल) पाया जाता है ! रुद्राक्ष प्रकार के सम्पूर्ण जानकारी पुराण मे मिलाजासकता है ! रुद्राक्ष के प्रकार और रुप को रुद्राक्ष मुखी कहते है और जाना जा सकता है ! रुद्राक्ष १ से 14 मुखी तक पुराण मे उल्लेख कियागया है और आजकाल रुद्राक्ष १५ से २१ मुखी रुद्राक्ष तक भी मिला गया है ! ये १५ से २१ मुखी रुद्राक्ष को भी बहुत अच्छा मानाजाता है और ये  दुर्लभ भी होता है !

कैसे पहचाने विभिन्न प्रकार के रुद्राक्ष मुखी – रुद्राक्ष के प्रकार

-प्रत्यक  रुद्राक्ष के दाना(फल) मे मुखी होता है ! मुखी का अर्थ है रुद्राक्ष मे होने वाला प्राकृतिक धार! विभिन्न प्रकारके रुद्राक्ष मे विभिन्न मात्रामे  धार होता है ! कुछ रुद्राक्ष मे १ धार होता और कुछ मे २ धार , कुछमे ३ और र कुछ मे १० धार भी होता  है ! रुद्राक्ष दाना(फल) मे हुवा होगा धारी को आंख और हाथ से गिन्ना मिलसकता है!रुद्राक्ष का प्रकार वोही धार की संख्या से होती है !रुद्राक्ष के पेड़ मे कोई भी मुखी(किसी भी संख्या मे धार हुवा रुद्राक्ष) उत्पादित होता है !येही फरक हे कि कुछ रुद्राक्ष पाने के लिए दुर्लब होता है !इकलौता पेड़ मे सबी रुद्राक्ष के मुखी संयुक्त होकर फलता है ! ज्यादा जैसा रुद्राक्ष के पेड़ मे एकिसाथ २,३,४.५  मुखी भी वोही और ज्यादा अनेक मुखी भी उसी पेड़ मे फलता है ! रुद्राक्ष के पेड़ मे किसी मुखी भी फल सकता है !

रुद्राक्ष के पेड के लिए विभिन्न मुखी के लिए  हावा पानी का भी असर पड़ता है ! कुछ जग दुर्लब मुखी फल ता है और कुछ जग असानी से पाने वाला रुद्रक्षा मात्र मिलता है ! इसका अर्थ है कुछ रुद्राक्ष के पेड मे ज्यादा तर एकि मुखी फलता है !मेने ये देखा है की एक पेड़ मे पाँच मुखी रुद्राक्ष सिवाय दुसरा कोहि भी मुखी नही फला हुवा भी देखा है !और फल ही गया तो कुछ रुद्राक्ष मुखी जैसा ७ मुखी कुछ दाना ,और कम संख्या मे कुछ मुखी फल गया है !पाँच मुखी रुद्राक्ष ,रुद्राक्ष से मे से असानी से फल्नेवाला और उत्पादित होने वाला रुद्राक्ष है !इसलिए रुद्राक्ष के पेड़ मे कुछ भी प्रकार रुद्राक्ष मुखी मिल जासकता है !

इस प्रकार रुद्राक्ष मे होने वाला ‘रुद्राक्ष मुखी’ और ‘रुद्राक्ष प्रकार’ पहिचान रुद्राक्ष मे होने वाला धार से किया जाता है ! रुद्राक्ष के प्रकार के नाम पहिचान भी वोही रुद्राक्ष मे होने वाला धार की संख्या से राखा जाता है ! उदाहरण के लिए – मात्र एक धार होने वाला रुद्राक्ष दाना(फल) को एक मुखी रुद्राक्ष कहाँ जाता है , १० धार होने वाला रुद्राक्ष को ‘दश मुखी रुद्राक्ष’ रुद्राक्ष कहा जाता है ! रुद्राक्ष मे जित्ना धार हो उसी अनुसार से मुखी पहिचान नाम दिया जाता है ! आजतक नेपाल मे १ मुखी से २१ मुखी तक उत्पादन हुवा है ! २१ मुखी रुद्राक्ष मे २१ धार होता है ! मैने ये भी सुना है की नेपाल मे २७ मुखी रुद्राक्ष भी फला हुवा है जिसमे २७ धार होता ,ये रुद्राक्ष बहुत दुर्लभ होता है ! सम्पूर्ण रुद्राक्ष प्रकार के देवी देवता का महत्व और पुजन और धारण का फल हमारे हिन्दु धर्म के पुराण मे दिया हुवा हे ! सम्पूर्ण रुद्राक्ष मुखी के,देवी देवता का प्रतिक,फल,महत्व और जानकारी नीचे समाबेश किया गया है !

विभिन्न मुखी रुद्राक्ष जानकारी और प्रत्यक रुद्राक्ष मुखी मे विभिन्न देवी देवता का प्रतिक(बास) और सभी रुद्राक्ष धारण,पुजन के फल (बरदान)

 

१ मुखी रुद्राक्ष

–एक मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेज़ी मे One mukhi,ek mukhi और one Face rudraksha beads कहा जाता है! एक मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव के प्रतिक है ! एक मुखी रुद्राक्ष मे मात्र एक धार होता है ! एक मुखी रुद्राक्ष बहुत दुर्लभ रुद्राक्ष है ! गोल एक मुखी रुद्राक्ष पाने के लिए मुस्किल होता है ! गोल एक मुखी रुद्राक्ष पशुपति नाथ मन्दिर काठमाडौँ मे ढुकुटी मे सजाहुवा है ! प्रत्यक साल नागमणि,विभिन्न रत्न के साथ देखानेका चलन है ! ये भक्तजनो को देखानेका समय बालाचतुर्दशी पर्व है!साल मे एक बर ही एक मुखी रुद्राक्ष देखाया जाएगा !नेपाल एक मुखी रुद्राक्ष दुर्लभ होने का कारण इन्डोनेसिया और इंडिया का एक मुखी रुद्राक्ष को पुजा ठिक होगा !एक मुखी रुद्राक्ष शक्तिशाली रुद्राक्ष हे और ये धारण और पुजन करने से मुक्ति मिल जाता है ! एक मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण रोग,पाप हर्ने वाला होता है !नेपाल एक मुखी ५ करोर देने से भी नही मिलता है और इसमे शिव कृपा होता है !

अन्त मे एक मुखी रुद्राक्ष(one mukhi Rudraksha) –  एक मुखी रुद्राक्ष छोटा,बडा,लम्बे,चेप्टा,गोला और किसी भी आकार का हो इस रुद्राक्ष मे एक धार हि होना चाहिए! एक धार से ज्यादा और कम नही होना चाहिए ! ये रुद्राक्ष के संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल एक मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

२ मुखी रुद्राक्ष

 –दो मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेज़ी मे Two mukhi,Do mukhi और Two Face rudraksha beads कहा जाता है!दो मुखी रुद्राक्ष भगवान शिवपार्वती के प्रतिक हे ! ये रुद्राक्ष शिवपार्वती का “अर्धनारेश्वर” रुप हे ! अर्धनारेश्वर रुपको शिवपार्वती विराजमान हुवा हुवे एक रुप कहते है !इसलिए दो मुखी रुद्राक्ष को शिवपार्वती जप करने और पुजा करने से धारणकर्ता से शिवपार्वती खुस रहते है ! दो मुखी रुद्राक्ष गले मे पहनने से पहले “शिवपार्वती मन्त्र” और “दो मुखी रुद्राक्ष मुल मन्त्र”   जप और स्तुति करने से शिवपार्वती सदैव धारणकर्ता से खुस रहते है !दो मुखी रुद्राक्ष मे मात्र दो (धार//लाइन) होता है ! दो मुखी खासकर ज्यादा दुर्लभ नही होता लेकिन ये साधारण रुद्राक्ष के तुलना मे महगा हि होता है ! ये रुद्राक्ष नेपाल एक मुखी रुद्राक्ष की तुलना मे मेहेगा नही होता है और हमारे दोकान और किसी भी नेपाल के रुद्राक्ष दोकान मे खरिद्ने के लिए मिलजाएगा !दो मुखी रुद्राक्ष मे दो से कम और ज्यादा (धार//लिने) हुवी तो ये रुद्राक्ष को दो मुखी रुद्राक्ष नही कहलाता है !ये रुद्राक्ष मे केवल हात और आख से गिन्ने मे मुस्किल नही होने वाली दो धार हि होता है !रुद्राक्ष का मुखी जैसे एक ,दो,तिन,चार, पन्द्र,बिस,चौध और किसी भी रुद्राक्ष हो वो रुद्राक्ष मे जित्ने धार हुवा उस रुद्राक्ष को वोही नाम दिया जाता है उदाहरण के लिए ५ धार होने से उस रुद्राक्ष को पाँच मुखी रुद्राक्ष कहते है ! दुसरा उदाहरण है केवल ठीक सात धार वाला रुद्राक्ष को “सात मुखी रुद्राक्ष” कहते है !

अन्त मे दो मुखी रुद्राक्ष(Two mukhi Rudraksha) –  दो मुखी रुद्राक्ष छोटा,बडा,लम्बे,चेप्टा,गोला और किसी भी आकार का हो इस रुद्राक्ष मे दो धार हि होना चाहिए! दो धार से ज्यादा और कम नही होना चाहिए ! ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल दो मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

३ मुखी रुद्राक्ष

–तिन मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेज़ी मे Three mukhi,Tin mukhi और Three Face rudraksha beads कहा जाता है! तिन मुखी रुद्राक्ष भगवान अग्नि,ब्रह्म,विष्णु और भगवान महेश्वर क प्रतिक हे ! तिन मुख रुद्राक्ष यज्ञ का रुप हे !ये रुद्राक्ष धारण और पूजा करनेसे सम्पूर्ण किया हुवा होम,पूजा मे अग्निदेव प्रसन्न होते है!तिन मुखी रुद्राक्ष सुद्द के भी प्रतिक हे क्युकी अग्नि देवता से ज्यादा सुद्द ये संसार मे कोहि भी नही है !तिन मुखी रुद्राक्ष मे मात्र तिन धार होता है ! तिन मुखी रुद्राक्ष आसानी से मिल सकता है और ज्यादा पैस खर्च नही होगा!तिन मुखी रुद्राक्ष मे येदी तिन से ज्यादा और कम धारी हुवा तो वो रुद्राक्ष को तिन मुखी रुद्राक्ष नही कहलाता है ! इस रुद्राक्ष मे ठिक ३ धार हि होना चाहिए ! येदी ये रुद्राक्ष छोटा,बडा ,चेप्टा,गोला,और किसी भी आकार हो इसमे फरक नही पडता है लेकिन  असली तिन मुखी रुद्राक्ष मे तिन धारी हि होना चाहिए ! ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल तिन मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

४ मुखी रुद्राक्ष

–चार मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेज़ी मे Four mukhi,Char mukhi और Four Face rudraksha beads कहा जाता है! चार मुखी रुद्राक्ष भगवान ब्रह्मा के प्रतिक है ! ये रुद्राक्षमे भगवान ब्रह्मा और माता सरस्वति के साधिन्य रहता है ! भगवान ब्रह्मा ये संसार के सृष्टिकर्ता है और भगवान ब्रह्मा संसारमे निर्माता का भुमिका और कार्य सम्हालते है ! सरस्वति माता बिद्या,सभ्य ,शिष्ट के प्रतिक है ! सभी रुद्राक्ष भगवान शिव हि है और चार मुखी रुद्राक्ष मे भगवान शिव ‘ब्रह्मा देव और माता सरस्वति’ के साथ् बिराजमान होते है !चार मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण कार्य मे सिद्ध प्राप्ति हासिल कराएगा!चार मुखी रुद्राक्ष मे मात्र चार धार होता है!चार मुखी रुद्राक्ष आसानी से मिल जासकता है और ज्यादा रकम खर्च नही होगा !चार मुखी रुद्राक्ष मे येदी चार से ज्यादा और कम धारी हुवा तो ये रुद्राक्ष को चार मुखी रुद्राक्ष नही कहलाता है और दुसरा अन्य मुखी उसमे हुवा धार से कहलाता है ! चार मुखी रुद्राक्ष येदि छोटा ,बडा ,चेप्टा और किसी भी आकार और आकृति हो लेकिन असली चार मुखी रुद्राक्ष मे मात्र प्राकृतिक चार धार होना चाहिए ! ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल चार मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

५ मुखी रुद्राक्ष

–पाँच मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेज़ी मे Five mukhi,panch mukhi और five face rudraksha beads कहा जाता है! पाँच मुखी रुद्राक्ष भगवान कालअग्नि रुद्र के प्रतिक है !कालअग्नि रुद्र भगवान शिव के एक नाम है ! भगवान शिवके भयभीत,भएंकर और क्रोधित मुद्राको कालअग्नि रुद्र कहते है !ये रुद्राक्ष धारण और पुजा करने से भगवान शिवजी के क्रोधित समय पर भी खुस कर सकते है !पाँच मुखी रुद्राक्ष भगवान पशुपतिनाथ शिव जी का हि प्रतिक है !ये रुद्राक्ष मे हुवा पाँच धार और मुख को भगवान शिव के पाँच मुख हि जाना जा सकता है ! ये रुद्राक्ष पेड मे ज्यादा मात्र मै उत्पादन होता है ! ये रुद्राक्ष सम्पूर्ण रुद्राक्ष मे आसानी मिल जाने वाला रुद्राक्ष है !

भगवान शिव संसार के देवादीदेव हुनुहुन्छ! देवता से पुजनीय भगवान शिव हि है ! पाँच मुखी रुद्राक्ष शक्तिशाली रुद्राक्ष है क्युकी स्वोयम शिव जी संसार के हित के लिया पंच मुख मे विराजमान है ! पाँच मुखी रुद्राक्ष मे मात्र पाँच धार होता है ! पाँच मुखी रुद्राक्ष मा पाँच धार से कम वा ज्यादा हुवा तो ये रुद्राक्ष को पंच(पाँच मुखी रुद्राक्ष) नही कहलाता है !पाँच मुखी छोटा,बडा,चेप्टा,गोल और किसी भी आकार और आकृति हो उसमे कुछ फरक नही होता है लेकिन असली पाँच मुखी रुद्राक्ष मे पाँच धार होना चाहिए! ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल पाँच मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

६ मुखी रुद्राक्ष

छे मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेज़ी मे Six mukhi,Che mukhi और Six face rudraksha beads कहा जाता है! छे मुखी रुद्राक्ष भगवान कुमार कार्तिकेय के प्रतिक है ! भगवान कुमार को मुरुगान भी कहाँ जाता है!कुमार कार्तिक भगवान शिव के बडा बेटा है और गणेश छोटा!
भगवान कुमार देवता के बीच मे ज्ञानी और बुद्दिमान भगवान है ! भगवान कुमार शक्तिशाली देवता है और हमारे हिन्दु धर्म मे विभिन्न तर पुजा किया जाता है !छे मुखी रुद्राक्ष
धारण और पूजा करने से बुद्दी और मस्तिक को अपने बस मे राख कर हिड़ना मद्दत करेगा और बिकसित के रास्ता लगेगा !छे मुखी !रुद्राक्ष कुबुद्धि मिटाकर सुबुद्धि प्रदान करता है !ये रुद्राक्ष सम्पूर्ण कार्य मे सिद्ध प्रदान कर्ता दायक है ! छे मुखी रुद्राक्ष मे केवल छे धार होता है! अगर छे से ज्यादा और कम धार(धारी) हुवा तो ये रुद्राक्ष को छे मुखी रुद्राक्ष नही कहलाता है ! येदी रुद्राक्ष चेप्टा,मेडा,गोल,बडा,छोटा और किसी भी आकार और आकृति का हो उसमे कुछ फरक नही पड़ता है लेकिन वो असली छे धार वाला छे मुखी रुद्राक्ष होना चाहिए !ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल छे मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

७ मुखी रुद्राक्ष 

–  सात मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेजी मे seven mukhi,saat mukhi और Seven face rudraksha beads कहा जाता है! सात मुखी रुद्राक्ष सप्त ऋषि और सप्त मात्रिका के प्रतिक है ! सप्त ऋषि ब्रह्माण्ड के सात प्रमुख ऋषि है ! सप्त मात्रिका को सात देवी और मा कहा जाता है! यहां तक कि सप्त मात्रिका देवता का भी माता माना जाता है ! सम्पूर्ण रुद्राक्ष भगवान शिव हि है और ये रुद्राक्ष भगवान शिव जी सप्त मात्रिका और सात ऋषि के साथ विराजमान है !इसलिए ये रुद्राक्ष बिशेष माना जाता है ! जो मनुस्य साथ मुखी रुद्राक्ष को धारण और पुजा करता है उसको सप्त मात्रिका,सप्त ऋषि और शिव पार्वती के सदैव कृपा होता है ! हमारे हिन्दु ग्रन्थ मे येही लिखा है स्वोयम शिव जी अपने पुत्र कुमारसे ये कहा है कि मे सम्पूर्ण जगत के हितार्थ रुद्राक्ष हि हु! जो मनुष्य रुद्राक्ष पुजा और गले मे धारण करता हो मे उसके हित के लिए सदैव तत्पर हुँगा! ये रुद्राक्ष बुरा रास्ता छोडकर सकारात्मक रास्ता चल्ने का फल और बरदान प्रदान करता है ! किसी भी रुद्राक्ष को पुजा और धारण करने से मनुष्य ने किया हुवा सम्पूर्ण पाप नाश होता है ! ये रुद्राक्ष सम्पूर्ण ग्रह दोष भी माफ करने वाला होता है और उसमे बिशेष पुजा और सदभाव होना चाहिए ! सात मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण किया हुवा कार्य जैसे पुजा,धर्म,कर्म,काम,यज्ञ और किसी भी धर्म और सकारात्मक हित विचार को सिद्ध प्रदान करता है ! ये रुद्राक्ष मोक्ष प्रदायक है! सप्त मात्रिका माता के कृपा से ये रुद्राक्ष बिशेष पुजा और सप्त मात्रिका पुजा करने से रोग से असानी से मुक्ति मिलता है ! ये रुद्राक्ष धारणकर्ता को सप्त ऋषि,सप्तमात्रिका,भगवान शिव पार्वती,गणेश ,विष्णु,दुर्गा,कुमार बिशेष रुप से दैनिक पुजा करने से संसार बन्धन मे दुख नही होगा और वो मनुष्य सबका पुजनीय होता है !सात मुखी रुद्राक्ष केवल सात धार(धारी) होता है ! एदी ये रुद्राक्ष मे सात से ज्यादा और काम धार हुवा तो ये रुद्राक्ष को साथ मुखी रुद्राक्ष नही कहलाता है! ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल सात मुखी रुद्राक्ष दाबिये !

 

८ मुखी रुद्राक्ष

–आठ मुखी रुद्राक्ष को अंग्रेजी मे Eight mukhi,aath mukhi और Eight face rudraksha beads कहा जाता है!आठ मुखी रुद्राक्ष भगवान गणेश के प्रतिक है ! भगवान गणेश भगवान शिव पार्वती के छोटा बेटा है और कुमार भगवान बढे बेटा ! भगवान गणेश देवतावो मे बुद्धिजीवी,बहादुर,शक्तिशाली और शीघ्र प्रसन्न होनेवाला दयालु देव मानाजाता है ! भगवान गणेश को वैवभशाली भी माना जाता है भी मानाजाता है क्युकी वो रिद्दी सिद्धि के दाता है और खुस होनेपर भक्तवो पर धन भी प्रदान करते है ! गणेश जी को खुसपार्ने पर माता
लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होते है !हमारे हिन्दु धर्म मे लक्ष्मी माता को धनदेवी माना जाता है ! इसलिए लक्ष्मी सरस्वति और गणेश भगवान को एकसाथ पुजा करने मे सभी देवता खुस रहते है !

आठ मुखी रुद्राक्ष पहनने से पहले शिवपार्वती,गणेश ,कुमार,सरस्वति और लक्ष्मी माता का जप,मन्त्र और स्तोत्र करना चाहिए !आठ मुखी रुद्राक्ष पुजा स्थान मे भगवान गणेश,शिवपार्वती,सरस्वति,लक्ष्मी और कुमार के साथ रखना चाहिए ! आठ मुखी रुद्राक्ष और गणेश भगवान मे कुछ फरक नही हे इसलिए गणेश मन्त्र,शिवपार्वती मन्त्र,जप इत्यादी रुद्राक्ष और गणेश भगवान,शिवभगवान को एकिसाथ आरम्भ करना चाहिए ! रुद्राक्ष और भगवान गणेश पुजा मे कुछ फरक नही हे !

आठ मुखी रुद्राक्ष धारण और पूजा करनेसे पराक्रमी ,दयालु,सकारात्मक जीवन हासिल होगा और धनको अपने वश मे राख कर प्रगति के रास्ता हासिल दिलायेगा ! आठ मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण नकारात्मक सोच मिटाकर सकारात्मक सोचका आभिस्कार करता है ! ये रुद्राक्ष सम्पूर्ण कार्य मे सिद्ध हासिल करने मे मदद देता है ! आठ मुखी रुद्राक्ष सम्पूर्ण पाप को नाश करता है !सम्पूर्ण रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय हे इसलिए आठ मुखी रुद्राक्ष  धारण और पुजन करनेसे भगवान शिव  और माता पार्वती धारण और पुजन करतासे खुश रहते है !आठ मुखी रुद्राक्ष मे मात्र आठ धार और धारी होता है ! एदी रुद्राक्ष मे आठ से ज्यादा और कम धार हुवातो ये रुद्राक्ष को आठ मुखी रुद्राक्ष नही कहलाता है ! आठ मुखी रुद्राक्ष किसी भी आकार,छोटा,गोल और किसी भी आकृति हो असली आठ मुखी रुद्राक्ष मे आठ धार होना चाहिए !ये रुद्राक्ष संबंध ज्यादा जान्ने के लिए नेपाल आठ मुखी रुद्राक्ष दाबिये !